First week Of Pregnancy - गर्भवस्था के पहले हफ्ते में हो सकती है मित्तली की समस्या

गर्भवस्था के पहले हफ्ते में हो सकती है मित्तली की समस्या / First week Of Pregnancy

गर्भवस्था के दौरान महिला विभिन्न चरणो से गुज़रती है। प्रारम्भिक चरणो में गर्भवस्था की स्तिथि का पता नही चलता, परन्तु कुछ संकेतो से गर्भवस्था का आभास लगाया जा सकता है। इस अवस्था में डॉक्टर से जांच अवश्य कराये। तो आइये हम आपको बताते है गर्भवस्था के लक्षण और उसके शुरूआती हफ्तों के बारे में। 



First week Of Pregnancy

Pregnancy Signs At Two Week

पहले सप्ताह के लक्षण / गर्भवस्था के प्रारम्भिक लक्षण 

गर्भवस्था का सबसे पहला लक्षण होता है महावारी का बंद होना। स्वस्थ महिला को प्रतिमाह निश्च्ति समय या उसके आस पास माहवारी अवश्य होती है। परन्तु यदि माहवारी बंद हो जाये तो ये गर्भवस्था का सबसे पहला लक्षण होता है। गर्भधारण कर प्रारम्भिक लक्षणों में जी मिचलाना, उलटी होना बार बार पेशाब का आना  होते है। माहवारी के 14 दिन के बाद आवूलेशन का होता है। यह समय गर्भधारण के लिए उत्तम माना जाता है अक्सर इसी समय में अधिकतर महिलाये गर्भवती होती है। गर्भधारण के बाद हार्मोन परिवर्तन होने लगते है। जिससे गर्भवती महिला  व्यवहार में भी उत्तर चढ़ाव आने लगते है। गर्भवस्था में उल्टियाँ आना एक विशेष लक्षण होता है। बार बार उल्टिया आना और गर्भधारण के शंका होने पर तुरंत चिकत्स्क के पास जाये और सलाह ले। गर्भधरण करने के बाद अक्सर थकान शिकायत रहती है और सिर दर्द होने लगता है। प्रारम्भिक दिनों में पैरो में सूजन भी आ जाती है। गर्ब्वस्था का प्रारम्भिक दौर एक माहवारी के पूरा होने से दूसरी माहवारी के शुरू होने के बीच का होता है। यानी पहली माहवारी के आखरी दिन से दूसरी माहवारी तक गर्भधारण हुए 28 दिन मान लिए जाते है। वैसे यह तय नही है, पतरंतु फिर भी आमतौर पर गर्भधारण कि प्रक्रिया में यही फार्मूला अपनाया जाता है। 

गर्भवस्था के प्रारम्भिक लक्षण


गर्भधारण के बाद आहार 

गर्भधारण के बाद हर एक महिला को आपने आहार में बदलाव कर देना चाहये। अब उन्हें केवल अपने लिए ही नही बल्कि अपने गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी खाना पीना चाहिए। डॉक्टर से सम्पर्क करके अपने खान पान और दिनचर्या के बारे में बताना चाहिए जिससे की डॉक्टर आपको बेहतर सलाह दे सके की आपको इस हालत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। आपको अपने खाने में प्रोटीन, विटामिन और केलोरी की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए। परन्तु ध्यान रहे की विटामिन सी और इ की मात्रा कितनी ली जाए इस बारे में डॉक्टर से परामर्श अवश्य कर ले। गर्भधारण के शुरूआती दिनों में विटामिन बी यानी फोलिक एसिड का सेवन करे। इस विटामिन के सेवन से बच्चे में जन्मजात दिमाग या रीढ़ की हड्डी खराब होने के खतरे से बचा जा सकता है। हालंकि डॉक्टर से भी अवश्य सलाह लेनी चाहिए की आपको कितनी मात्र में कितने विटामिन की मात्रा लेनी चाहिए। 


गर्भधारण के बाद आहार



इसके अलावा भूख न लगने पर भी आपको थोड़ा थोड़ा खा लेना चाहिए, जिससे की बच्चे को भरपूर पोषण मिलता रहे। आप डॉक्टर की सलाह से भी अपने डाइट चार्ट बनवा सकती है 

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